किरण गौड़/भारत लाइव टीवी 24
सोनभद्र ओबरा में विज्ञापन कमाने के लिए महिलाओं को बना लिया “ढाल”, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की माँग पत्रकारिता, जो कभी समाज का आईना मानी जाती थी, अब सोनभद्र जिले में कुछ कथित लोगों के लिए पैसा कमाने का जरिया बन चुकी है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, जिले के कई कस्बों और ग्रामीण इलाक़ों में कुछ स्वयंघोषित पत्रकारों ने विज्ञापन वसूली को अपना मुख्य कारोबार बना लिया है।सूत्र बताते हैं कि इन लोगों ने अब अपनी नई चाल शुरू कर दी है ये किसी भी गली या नुक्कड़ से महिलाओं को पकड़कर उन्हें “लेडी रिपोर्टर” का टैग दे रहे हैं ताकि आम व्यापारियों और खनन कारोबारियों से विज्ञापन हासिल करना आसान हो जाए।
ये कथित पत्रकार अच्छी तरह जानते हैं कि यदि वे खुद जाकर विज्ञापन मांगेंगे तो कोई नहीं देगा, इसलिए अब वे महिलाओं को आगे करके भावनात्मक और सामाजिक हथकंडा अपनाते हैं।खनन क्षेत्रों और स्थानीय व्यापारिक प्रतिष्ठानों से लेकर छोटे दुकानदारों तक हर किसी से ये लोग पत्रकारिता के नाम पर पैसे वसूलने में जुटे हैं। कई बार तो यह भी देखा गया कि महिला रिपोर्टर स्वयं भी यह नहीं जानतीं कि वे किस संगठन से “जुड़ी” बताई जा रही हैं। यह पूरा खेल सोनभद्र में फर्जी मीडिया नेटवर्क के रूप में तेजी से फैल रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि जिनके पास पत्रकारिता की कोई डिग्री या अनुभव नहीं है, आज वही कैमरा, मोबाइल और माइक लेकर रिपोर्टर बन बैठे हैं। इन फर्जी नेटवर्कों ने जिले की असली पत्रकारिता पर धब्बा लगा दिया है। उन्होंने पत्रकारिता को धंधा बनाने की ठान ली है।जनता अब मांग कर रही है कि प्रशासन और जिला सूचना विभाग ऐसे सभी तथाकथित पत्रकारों की जाँच करे। जिन लोगों का उद्देश्य केवल विज्ञापन से पैसे कमाना है और जो महिलाओं को ढाल बनाकर अपने फायदे का खेल खेल रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए।एक स्थानीय पत्रकार संघ के वरिष्ठ सदस्य ने कहा, “यह सिर्फ पत्रकारिता का अपमान नहीं, बल्कि उन सच्चे पत्रकारों के समर्पण पर भी सवाल है, जो समाज के लिए काम करते हैं। प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।”
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