बिल्ली खनन क्षेत्र में पत्रकारों को कवरेज से रोका गया धमकी का आरोप

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रिपोर्टर किरण गोंड भारत लाइव टीवी 24

सोनभद्र जनपद के ओबरा क्षेत्र अंतर्गत बिल्ली खनन इलाके में स्थित बजरंग स्टोन खदान एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला अवैध खनन या नियमों की अनदेखी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधे हमले का है।मिली जानकारी के अनुसार, खदान में जांच टीम के पहुंचने की सूचना पर क्षेत्र के विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकार मौके पर खबर कवरेज करने पहुंचे थे। पत्रकार जैसे ही खदान के आसपास पहुंचे, वहां पहले से मौजूद खदान मालिक द्वारा भेजे गए गुर्गों ने पत्रकारों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें कवरेज से रोकने की कोशिश की।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खदान के बाहर खड़े असामाजिक तत्वों ने न सिर्फ पत्रकारों को धक्का-मुक्की और बदसलूकी का शिकार बनाया, बल्कि खुलेआम धमकी भी दी। गुर्गों ने कहा कि“अगर दोबारा खबर कवरेज करने खदान में आए तो यहीं खदान में धकेल देंगे।”यह धमकी सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि पत्रकारों की जान को जोखिम में डालने जैसा गंभीर अपराध है। घटना के दौरान खदान क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और पत्रकारों को मजबूरन वहां से हटना पड़ा।पत्रकारों का कहना है कि वे पूरी तरह संवैधानिक अधिकारों के तहत जनहित में समाचार संकलन करने पहुंचे थे, लेकिन खदान संचालकों के इशारे पर काम कर रहे लोगों ने कानून को हाथ में लेते हुए पत्रकारिता को दबाने का प्रयास किया।यह घटना साफ तौर पर यह दर्शाती है कि खनन क्षेत्र में माफिया किस कदर बेखौफ हो चुके हैं और उन्हें न कानून का डर है, न प्रशासन का।

ओबरा थाना प्रभारी को सौंपा ज्ञापन*

घटना से आक्रोशित पत्रकारों ने एकजुट होकर पत्रकार हितों की रक्षा के लिए ओबरा थाना पहुंचकर थाना प्रभारी को लिखित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दोषी खदान मालिक, उसके गुर्गों और धमकी देने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।पत्रकारों ने स्पष्ट कहा कि यदि इस गंभीर मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करेगा, बल्कि सोनभद्र में स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा प्रहार माना जाएगा।प्रशासन से सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि खनन क्षेत्र में खदान मालिकों के गुर्गे किसके संरक्षण में खुलेआम धमकी दे रहे हैं?जांच टीम की मौजूदगी में ही यदि पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या?यह मामला अब सिर्फ बदतमीजी का नहीं, बल्कि आपराधिक धमकी, प्रेस की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।चेतावनी या चुनौती?पत्रकारों पर हुए इस हमले ने साफ संकेत दे दिया है कि खनन माफिया अब खबरों से डरने लगा है, और डर के कारण ही वह पत्रकारों को धमकाकर सच्चाई दबाने की कोशिश कर रहा है।अब देखना यह है कि ओबरा पुलिस और जिला प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई कर पत्रकारों को न्याय और सुरक्षा मिल पाती है या नहीं। इस मौके पर पत्रकारगण सतीश भाटिया, भोला दुबे, ऋषि गुप्ता, सुररेन्दर कुमार ,अरविंद कुशवाहा, कुंभध चौधरी, कन्हैयालाल केसरी, विकास हलचल, मुस्ताफ अहमद, किरण गौड़ इत्यादि पत्रकार मौजूद रहे।

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