बिल्ली खनन क्षेत्र में खदानें बंद होने से गहराया रोज़गार संकट

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सोनभद्र।बिल्ली खनन क्षेत्र में लगातार कई खदानों के बंद होने से क्षेत्र में रहने वाले सैकड़ों गरीब और मजदूर परिवारों की आजीविका पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। वर्षों से खनन कार्य पर निर्भर रहे मजदूर, ट्रक चालक, मशीन ऑपरेटर, लोडर, हेल्पर और छोटे व्यापारी अचानक बेरोज़गार हो गए हैं। खदानें बंद होने से न केवल प्रत्यक्ष रूप से जुड़े मजदूर प्रभावित हुए हैं, बल्कि ढाबा संचालक, किराना दुकानदार, पंचर बनाने वाले और अन्य छोटे व्यवसाय भी मंदी की मार झेल रहे हैं।

स्थानीय मजदूरों का कहना है कि खनन कार्य ही उनके परिवार की आय का एकमात्र साधन था। खदानें बंद होने के बाद उनके सामने घर चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों का खर्च, किराया और रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करना अब बड़ी चुनौती बन गया है। कई परिवार कर्ज़ लेकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं, जबकि कुछ लोग रोजगार की तलाश में दूसरे जिलों और राज्यों में पलायन करने लगे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, खदानों के बंद होने से पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई हैं। पहले जहां दिन-रात ट्रकों की आवाजाही रहती थी, वहीं अब सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय बाजारों में खरीद-फरोख्त घट गई है, जिससे व्यापारियों की कमर टूटती नजर आ रही है।

प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि खदानों को पर्यावरण नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जल्द से जल्द पुनः संचालित कराया जाए। यदि खदानों को खोलना संभव न हो, तो खनन क्षेत्र से जुड़े मजदूरों और गरीब परिवारों के लिए वैकल्पिक रोजगार, स्वरोजगार योजनाएं और आर्थिक सहायता की व्यवस्था की जाए।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बेरोज़गारी, गरीबी और पलायन जैसी समस्याएं और भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में बिल्ली खनन क्षेत्र में उत्पन्न इस हालात पर प्रशासनिक हस्तक्षेप और ठोस समाधान की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।

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