सीआईएसएफ में बड़ा प्रशिक्षण सुधार: युद्ध-सक्षम, तकनीकी दक्ष और भविष्य के लिए तैयार बनेगा बल

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किरण गौड़ की रिपोर्ट 

ओबरा/सोनभद्र।केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम और मानकों में व्यापक बदलाव कर जवानों को युद्ध-सक्षम, तकनीकी दक्ष और भविष्य के लिए तैयार बल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। यह जानकारी सीआईएसएफ इकाई OTHPP ओबरा के कमांडेंट सतीश कुमार सिंह ने साझा की।सीआईएसएफ के महानिदेशक राजविंदर सिंह भट्टी, आईपीएस की अध्यक्षता में राष्ट्रीय औद्योगिक सुरक्षा अकादमी (निसा), हैदराबाद में आयोजित वार्षिक प्रशिक्षण सम्मेलन-2025 में इन सुधारों को अंतिम रूप दिया गया। दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर से वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सीआईएसएफ की परिचालन तैयारियों को सर्वोच्च स्तर तक बढ़ाने के लिए एक साहसिक रोडमैप तैयार किया गया।युद्ध और शारीरिक प्रशिक्षण में नई ऊँचाई सभी रैंकों के लिए “One Force, One Outdoor Standard” नीति अपनाई जाएगी। इसका मतलब है कि सीआईएसएफ के सभी जवानों को, उनके बुनियादी प्रशिक्षण से ही, एनएसजी जैसे विशेष बलों के कठोर शारीरिक और युद्ध मानकों के अनुसार प्रशिक्षित किया जाएगा।सभी प्रशिक्षण केंद्रों में अब 26 बाधाओं वाले बैटल ऑब्स्टेकल असॉल्ट कोर्स (BoAC) को लागू किया जाएगा, जिनका कठिनाई स्तर और समय मानक NSG के समान होंगे। इसके अलावा, बल ने 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन और विशेष बलों द्वारा तैयार आतंकवाद-रोधी प्रशिक्षण मॉड्यूल को बुनियादी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है। प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण के पहले दिन से ही इन तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।सभी प्रशिक्षण केंद्रों में डिजिटल एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। बल को आग, आपदा और चिकित्सा संबंधी आकस्मिकताओं में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में कार्य करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।सभी पात्र रिक्रूट अपने बुनियादी प्रशिक्षण के दौरान हवाईअड्डा स्क्रीनिंग ड्यूटी के लिए अर्हता प्राप्त कर लेंगे, जिससे विमानन सुरक्षा में सुधार होगा।प्रशिक्षण क्षमता और महिला भागीदारी में वृद्धि सीआईएसएफ 2,000 प्रशिक्षकों का समूह बनाएगा, जिसमें 10% सीटें महिला कर्मियों के लिए आरक्षित होंगी। गृह मंत्रालय की मंजूरी से सभी भर्ती प्रशिक्षण केंद्रों की क्षमता 50% बढ़ाकर 1,500 की गई है और तीन नए आरटीसी की स्थापना को भी मंजूरी मिली है। इन प्रयासों से सीआईएसएफ हर साल लगभग 15,000 रिक्रूटों को प्रशिक्षित कर सकेगा।प्रशिक्षण गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानक।सीआईएसएफ का लक्ष्य है कि निसा, हैदराबाद को 5-स्टार और सभी आरटीसी को 4-स्टार रेटिंग प्राप्त हो। यह न केवल प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता को मान्यता देगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाएगा।विशिष्ट उत्कृष्टता केंद्र और आधुनिकीकरण।प्रथम रिजर्व बटालियन, नूह: खेल उत्कृष्टता केंद्र।CASA: नागरिक उड्डयन सुरक्षा प्रशिक्षण।तृतीय रिजर्व बटालियन, भिलाई: अग्निशमन सेवा प्रशिक्षण केंद्र (FSTC)।₹450 करोड़ का आवंटन: बुनियादी ढाँचे और तकनीकी उन्नयन के लिए आधुनिकीकरण योजना-V।सीआईएसएफ अब प्रमुख विश्वविद्यालयों जैसे उस्मानिया, हैदराबाद, मद्रास, इग्नू और जेएनयू के साथ साझेदारी में निरंतर कौशल उन्नयन और प्रमाणन कार्यक्रम भी आयोजित करेगा। जल्द ही एक ऑनलाइन आवेदन पोर्टल शुरू होगा, जिससे पारदर्शिता और सभी के लिए पहुँच सुनिश्चित होगी।महानिदेशक राजविंदर सिंह भट्टी, आईपीएस ने कहा:

“ये सुधार सीआईएसएफ को युद्ध-सक्षम, तकनीकी दक्ष और भविष्य के लिए बहु-कुशल बल बनाएंगे। हमारे प्रशिक्षण संस्थान विश्व स्तरीय मानकों तक पहुँचेंगे और भारतीय राष्ट्रीय क्षमता निर्माण में उत्कृष्टता के प्रतीक के रूप में उभरेंगे।”उपरोक्त जानकारी सीआईएसएफ OTHPP ओबरा कमांडेंट सतीश कुमार सिंह ने दी।

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