पूजा स्थल अधिनियम 1991 के विरुद्ध फैसला सुनाने वाले निचली अदालतों के जजों के विरुद्ध कार्यवाई की मांग

155

सोनभद्र।पिछले दो वर्षों से यह देखा जा रहा है कि निचली अदालते पूजा स्थल अधिनियम 1991 के विरुद्ध फैसले सुना रही है। गौरतलब है कि उक्त अधिनियम यह स्पष्ट करता है कि 15 अगस्त 1947 के दिन तक धार्मिक स्थलों का जो भी परित्र है इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता और उसे चुनौती देने वाली कोई याचिका किसी अदालत प्राधिकार अथवा न्यायाधिकरण के समक्ष स्वीकार भी नहीं की जा सकती। वहीं बाबरी मस्जिद पर दिये कसले से भी सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थल अधिनियम 1991 को संविधान के बुनियादी ढांचे से जुड़ा बताया था। गौरतलब है कि संविधान के बुनियादी ढांचे में किसी भी तरह का बदलाव संसद भी नहीं कर सकती जैसा कि केशवालय भारती व एसआर बोम्मई केस समेत विभिन्न फैसलों में खुद सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है। वही असलग भूरा बनाम भारत सरकार मामले में (रिट पिटीशन नंबर 131 / 1997) 14 मार्च 1997 को दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट में आदेश दिया था कि काशी विश्वनाथ मंदिर, जानवापी मस्जिद, मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही इदगाह की स्थिति में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। अपने पुराने निर्णय (रिट पेटिशन 541/1995) का हवाला देते हुए कोर्ट ने यह भी कहा था कोई भी अधिनस्थ अदालत इस फैसले के विरुद्ध निर्देश नहीं दे सकती। लेकिन यह देखा जा रहा है कि बनारस के ज्ञानवापी मस्जिद, बदायूँ की जामा मस्जिद और यहाँ तक कि ताज महल तक को मन्दिर बताने वाली याचिकाएं जिला अदालते स्वीकार कर पूजा स्थल अधिनियम 1991 और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध निर्णय दे रही है। जिसपर सुप्रीम कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने और कार्यवाई करने की मांग हेतु अल्पसंख्यक कांग्रेस द्वारा 9 मई 2022 और 12 सितंबर 2022 को आपको ज्ञापन प्रेषित किया जा चुका है। बनारस की जिला अदालत द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का एएसआई द्वारा सर्वे का हालिया आदेश एक बार फिर पूजा स्थल अधिनियम 1991 का उल्लंघन और आपके सुप्रीम कोर्ट के फैसले का खुला उल्लंघन है। हम आपको पुन अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी याद दिलाकर आग्रह करते हैं कि अपने अधीनस्थ अदालतों द्वारा संविधान और स्थापित कानूनों के खिलाफ फैसले देने वाले जजों के खिलाफ सख्त कार्यवाई करे ताकि न्यायपालिका की निष्पक्षता में लोगों का भरोसा कायम रह सके। इसी को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने डीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला अध्यक्ष शब्बीर अहमद, सरफराज खान प्रदेश सचिव, तौकीर नवाज सिद्दीकी, अली शेर, नूरुद्दीन खान पूर्व जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस पार्टी इत्यादि लोग उपस्थित रहे।

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)

Live Share Market

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे
Donate Now